सीएमपी पहल

 

केन्द्रीय विद्यालय नरेला

सी एम पी पहल २०१६- १७ 

क्रमांक

गतिविधियाँ

 

परिकल्पित

 

परिणाम

१.

तत्परता कार्यक्रम - कक्षा प्रथम में प्रवेश प्राप्त छात्र-छात्राओं को विद्यालय के परिवेश से जोड़ने हेतु ।

छात्र-छात्राओं में विद्यालय परिवेश,पाठ्यक्रम तथा विभिन्न क्रियाकलापों के प्रति जागरूकता पैदा करना तथा औपचारिक ज्ञान हेतु तैयार करना ।   

सीखने की प्रक्रिया सफल रही ।

 

२.

अध्यापक संगोष्ठी -  नए छात्रों के अभिभावकों के साथ अध्यापक संगोष्ठी |

अभिभावकों में विद्यालय परिवेश,पाठ्यक्रम तथा विभिन्न क्रियाकलापों के विषय में जानकारी देना ,अभिभावक के दायित्वों के प्रति जागरूकता पैदा करना तथा विद्यालय परिवार को आवश्यकता अनुसार सहयोग प्रदा करना । 

अभिभावकों में अपने दायित्वों के प्रति जागरूकता की भावना पैदा हुई एवं अध्यापकों को सहयोग करने की भावना का विकास हुआ |

 

३.

सामूहिक भोज - कार्यक्रम के द्वारा छात्रों मैं परस्पर मेलजोल की भावना विकास हेतु ।

सामाजिक सदभावना तथा मेलजोल की भावना का विकास करना ।

 

बालकों में सामाजिक सद्भावना एवं परस्पर मेलजोल की भावना का विकास |

 

४.

चलचित्र कार्यक्रम -महान व्यक्तित्व की जीवनी तथा मूल्यपरक  व अच्छी आदतों को विकसित करने सम्बंधित कथानक ।

 

जीवन मूल्यों का विकास करने का प्रयास करना ।

 

छात्रों में आवश्यक जीवन मूल्यों के विकास में सहायता |

 

५.

संप्रेषण कौशल का विकास- वाचन कौशल के विकास हेतु ।

 

छात्रों में भाषायी कौशलों ( पठन पाठन, वाचन एवं  लेखन ) का विकास करना ।

 

छात्रों में भाषायी कौशलों के विकास में सहायता |

 

६.

विद्यालय तत्परता कार्यक्रम घर और विद्यालय के परिवेश में अपेक्षित सामंजस्य स्थापित करने हेतु ।

 

विद्यालय के परिवेश को समझते हुए छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास उत्पन्न करने का प्रयास । 

 

छात्र छात्रों के आत्मविश्वास में वृद्धि |

 

७.

परिभ्रमण / पर्यटन – छात्र छात्राओं के बौद्धिक एवं सामाजिक विकास के लिए विभिन्न रुचिकर स्थलों पर भ्रमण का प्राविधान ।

 

छात्रों में स्वस्थ मानसिकता एवं नागरिकता की भावना का विकास ।            

 

परिभ्रमण से मनोरंजन एवं मनोविनोद के साथ छात्रों के मानसिक एवं सामाजिक विकास में वृद्धि ।

 

८.

चलचित्र प्रस्तुति – छात्र छात्राओं के वाचन कोशल के विकास हेतु ।

 

अधिगम प्रक्रिया के सुगम तरीके प्रदान करना ।  

 

सीखने की प्रक्रिया रोचक एवं सुगम बनी |

 

९.

दानपुण्य संस्था – वृद्धों की देखभाल और मदद की भावना के विकास हेतु ।

आपसी प्रेमसुरक्षा एवं सौहार्द की भावना का विकास ।

 

बालकों में अपने परिवार के वृद्ध जनों की परवाह एवं मदद करने की भावना का विकास |